अमरोहा

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  • वाद्य यंत्र(ढोलक)

    वाद्य यंत्र(ढोलक)

    अमरोहा में लगभग 300 से अधिक छोटी इकाइयाँ हैं जो ढोलक के निर्माण से संबंधित हैं । इन इकाइयों से लगभग 1000 कारीगरों को रोजगार मिलता है । ये ढोल एक छड़ी की सहायता से बजाई जाती है । सामाजिक विकास के कारण इस वाद्य यंत्र के प्रयोग को विस्तार मिला है ।

    परिचय

    अमरोहा उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, मुरादाबाद के निकट स्थित एक छोटा सा कस्बा है । अमरोहा का नामकरण "आम" व "रूहा" (मछली की एक प्रजाति जो यहाँ बहुतायत से पायी जाती है ) के नाम पर हुआ है । यह छोटा सा कस्बा मुख्य रूप से ढोलक व तबला के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है । यहा पर अनेकों लघु उद्योग हैं जो ढोलकों व अन्य बीटिंग वाद्य यंत्रों के निर्माण में सलग्न हैं । इन यंत्रों के खोखले ब्लाक्स के निर्माण के लिए आम व शीशम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें बाद में जानवरों के चमड़े से मढ़ा जाता है । इनमें से अधिकतर पर बकरी की चमड़ी का प्रयोग होता है । अमरोहा से ये वाद्य यंत्र पूरे देश में यहाँ तक कि विदेशों में भी भेजे जाते हैं । अमरोहा के कुछ उद्योगों में सूत (धागे) व कपड़ों, हथकरघा , मिट्टी के बर्तन बनाना तथा खांडसारी उद्योग शामिल हैं । द्वितीय स्तरीय उद्योगों में कालीन निर्माण, लकड़ी पर नक्काशी व ढोलक निर्माण शामिल हैं ।

    • तहसील

      3

    • विकास खंड

      6

    • ग्राम

      1133

    • पंजीकृत
      औद्योगिक इकाइयाँ

      1640

    • लघु उद्योग

      -

    • संगीत यंत्र उद्योग
    • धागा व कपड़ा उद्योग
    • जैविक उद्योग
    • हथकरघा बुनाई उद्योग
    • बर्तन उद्योग
    • खांडसारी उद्योग
    • कालीन उद्योग
    • काष्ठ कला
    • कागज उद्योग

    मुस्लिम बहुत क्षेत्र होने के नाते, यहाँ बहुत से माहिर कारीगर हैं जो इन संगीत यंत्रों को बनाने में अपनी कला पिरो देते हैं । यहाँ अन्य बहुत से कारीगर है जो कालीन और लकड़ी के खिलौने बनाने के क्षेत्र में सिद्धहस्त हैं।.